नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर जैफ्री एप्स्टीन से कथित संबंधों को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद पुरी ने प्रेस वार्ता कर अपना पक्ष रखा।
पुरी ने कहा कि उनकी मुलाकात अमेरिकी अपराधी Jeffrey Epstein से “कुछ मौकों पर” हुई थी, लेकिन उन मुलाकातों या बातचीत का एप्स्टीन पर लगे आपराधिक आरोपों से कोई संबंध नहीं था। उनका यह स्पष्टीकरण राहुल गांधी के उस दावे के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि केंद्रीय मंत्री का नाम अमेरिका में जारी ‘एप्स्टीन फाइल्स’ में सामने आया है।
आईपीआई से जुड़ाव के दौरान हुई थी मुलाकात
पुरी ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत पद से इस्तीफा देने के कुछ महीनों बाद उन्हें इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) से जुड़ने का निमंत्रण मिला था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह संस्थान के स्थायी अंग नहीं थे, बल्कि बहुपक्षवाद पर गठित स्वतंत्र आयोग (ICM) में महासचिव के रूप में कार्य कर रहे थे।
उनके अनुसार, आईपीआई में उनके वरिष्ठ टेर्जे रोड-लार्सन एप्स्टीन को जानते थे और प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में ही उनकी एप्स्टीन से तीन या अधिकतम चार बार मुलाकात हुई। पुरी ने कहा कि आईसीएम अंतरराष्ट्रीय और विषयगत मुद्दों पर कार्य कर रहा था और एप्स्टीन उसकी गतिविधियों का हिस्सा नहीं था।
आरोपों से दूरी बनाई
पुरी ने कहा कि एप्स्टीन पर गंभीर आपराधिक आरोप थे और कई पीड़ितों ने उसके खिलाफ मामले दर्ज कराए थे। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि उनकी बातचीत का इन मामलों से कोई लेना-देना नहीं था।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने इस विषय में पिछले वर्ष राहुल गांधी को एक लिखित नोट भेजकर स्थिति स्पष्ट की थी। इसके बावजूद लोकसभा में उनका नाम लिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
राजनीतिक बयानबाजी पर प्रतिक्रिया
पुरी ने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त आधार के सार्वजनिक मंच से नाम लेना उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है। वहीं, कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता आवश्यक है और उठाए गए सवालों का स्पष्ट उत्तर दिया जाना चाहिए।
यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है, जिसमें दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं।